पुलिस कार्रवाई से पत्रकारों में उबाल, कलेक्ट्रेट तक मार्च, 24 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन।

शाहजहांपुर। दो पत्रकारो को कथित रूप से हिरासत में लेने के मामले ने शुक्रवार को जिले में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रेस क्लब में बैठक के बाद पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपने पहुंचे। जिलाधिकारी के उपलब्ध न होने पर पत्रकार विकास भवन के सभागार में धरने पर बैठ गए। बाद में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की पहल पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से वार्ता की।
बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने स्वीकार किया कि एसओजी टीम से कार्रवाई में गलती हुई है। उन्होंने कहा कि टीम को गलत फीडबैक मिलने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। एसपी ने सभी पत्रकारों के समक्ष एसओजी प्रभारी के विरुद्ध 24 घंटे के भीतर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकारों ने धरना समाप्त किया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
23 जुलाई की शाम करीब सात बजे हिंदी खबर टीवी चैनल के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज चैनल के पत्रकार विवेक मिश्रा शाहजहांपुर से पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर के पास एसओजी प्रभारी और उनकी टीम ने दोनों पत्रकारों को बिना कोई कारण बताए अपने वाहन में बैठा लिया तथा उनके मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए। इससे करीब तीन घंटे तक दोनों पत्रकारों का कोई संपर्क नहीं हो सका। पत्रकारों का आरोप है कि साथी पत्रकारों के दबाव के बाद दोनों को छोड़ा गया। उनका कहना है कि डिप्टी सीएम को काले झंडे दिखाने की घटना के बाद पुलिस ने बिना किसी साक्ष्य के उन्हें अपराधियों की तरह रास्ते से उठा लिया, जबकि वे अपने पेशेगत कार्य से जा रहे थे।
पत्रकारों ने ज्ञापन के माध्यम से एसओजी प्रभारी एवं संबंधित टीम को तत्काल निलंबित करने, दोनों पत्रकारों से पुलिस प्रशासन द्वारा लिखित रूप से माफी मांगने तथा भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को सूचना देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक पुलिस प्रशासन से संबंधित खबरों का बहिष्कार किया जाएगा। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो जिले के पत्रकार व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।