SOG कार्रवाई से पत्रकारों में भारी रोष, कलेक्ट्रेट तक मार्च, 24 घंटे में कार्रवाई का आश्वासन।


शाहजहांपुर। जनपद की SOG द्वारा दो पत्रकारो को कथित रूप से हिरासत में लेने के मामले ने तूल पकड़ लिया। इस घटना को लेकर जनपद भर के पत्रकारों में रोष उत्पन्न हो गया। मौखिक तौर पर बात करने के बाद भी पुलिस के आला अफसरों के कानों पर जूं नहीं रेगी।
जनपद की SOG द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार ने शुक्रवार को और भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। प्रेस क्लब के बैनर तले प्रेस भवन में जनपद के पत्रकारों ने इस मुद्दे को लेकर एक सभा आयोजित की जिसमें सभी ने एकमत हो कर कलेक्ट्रेड तक पैदल मार्च किया तथा ज्ञापन में मांग रखते हुए पुलिस के आला अफसरों से बात की।
बातचीत के दौरान ही पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन को कलम का दम दिखाते हुए पत्रकार एकता जिंदा बाद के जम कर नारे लगाए। जिसके बाद पुलिस अधीक्षक के आग्रह पर पत्रकार शांत हुए। पत्रकार समूह ने अपनी बात रखते हुए SOG द्वारा किए गए कृत्य में तत्काल जांच के बाद कार्यवाही की मांग की। पुलिस द्वारा 24 घंटे में कार्यवाही का आश्वासन माइक के बाद ही पत्रकार शांत हुए।
बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक ने स्वीकार किया कि एसओजी टीम से कार्रवाई में गलती हुई है। उन्होंने कहा कि टीम को गलत फीडबैक मिलने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। एसपी ने सभी पत्रकारों के समक्ष एसओजी प्रभारी के विरुद्ध 24 घंटे के भीतर उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकारों ने धरना समाप्त किया, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
23 जुलाई की शाम करीब सात बजे हिंदी खबर टीवी चैनल के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज चैनल के पत्रकार विवेक मिश्रा शाहजहांपुर से पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर के पास एसओजी प्रभारी और उनकी टीम ने दोनों पत्रकारों को बिना कोई कारण बताए अपने वाहन में बैठा लिया तथा उनके मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए। इससे करीब तीन घंटे तक दोनों पत्रकारों का कोई संपर्क नहीं हो सका। पत्रकार साथियों के दबाव के बाद दोनों पीड़ित पत्रकारों को छोड़ा गया। उनका कहना है कि डिप्टी सीएम को काले झंडे दिखाने की घटना के बाद पुलिस ने बिना किसी साक्ष्य के उन्हें अपराधियों की तरह रास्ते से उठा लिया, जबकि वे अपने पेशेगत कार्य से जा रहे थे।
पत्रकारों ने ज्ञापन के माध्यम से एसओजी प्रभारी एवं संबंधित टीम को तत्काल निलंबित करने, दोनों पत्रकारों से पुलिस प्रशासन द्वारा लिखित रूप से माफी मांगने तथा भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को सूचना देने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगें पूरी होने तक पुलिस प्रशासन से संबंधित खबरों का बहिष्कार किया जाएगा।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि 24 घंटे के भीतर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो जिले के पत्रकार व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।