स्वतंत्रता दिवस पर गोष्ठी: देश की आजादी सभी धर्मों की साझा कुर्बानियों का नतीजा— डॉ. मंसूर सिद्दीकी।

शाहजहांपुर। स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर मदरसा नुरुल हुदा बिजलीपुरा में “हिंदुस्तान की आजादी में मदरसों और उलमा का किरदार” विषय पर एक विचार गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता काजी-ए-शहर सैय्यद सैफ हसन ने की।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि जीएफ कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. मंसूर सिद्दीकी ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोगों के साझा संघर्ष का परिणाम है। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई में उलमा और मदरसों का योगदान अविस्मरणीय है, जिन्होंने यातनाएं सहकर भी देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. विकास खुराना ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास विद्यार्थियों को सही और निष्पक्ष तथ्यों के साथ पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने सभी सेनानियों को नमन करते हुए छात्रों से अच्छी शिक्षा हासिल कर देश के विकास में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काजी-ए-शहर सैय्यद सैफ हसन ने कहा कि आजादी की रक्षा करना हर नागरिक का परम कर्तव्य है। उन्होंने देश की उन्नति के लिए आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द को अनिवार्य बताया। सेमिनार को राजू बग्गा और अजय अवस्थी ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान इज़हार हसन, जहूर अहमद, कामरान हुसैन, मोहम्मद जाहिद, साजिद अली, शारिक अली खान, मोइन खान, रिज़वान अहमद, मुख्तार अहमद, अब्दुल कादिर, शारिक अली और हैदर अली सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।