NZA’ लिखे होने से तय नहीं होता भूमि का मालिकाना हक, राजस्व अभिलेख ही होते हैं आधार।
शाहजहाँपुर। सोशल मीडिया पर इन दिनों “NZA (Non Zamindari Abolition)” भूमि को लेकर विभिन्न प्रकार की जानकारियाँ साझा की जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भूमि पर केवल “NZA” दर्ज होने से उसके स्वामित्व का निर्धारण नहीं किया जा सकता। भूमि का वास्तविक मालिक राजस्व अभिलेखों जैसे खतौनी, खसरा और अन्य रिकॉर्ड में दर्ज नाम के आधार पर तय होता है।
जानकारों का कहना है कि यदि भूमि वक्फ के नाम दर्ज है तो उसका स्वामित्व वक्फ का माना जाएगा। यदि राज्य सरकार के नाम दर्ज है तो वह सरकारी भूमि होगी, जबकि किसी व्यक्ति के नाम दर्ज होने पर वह उसकी निजी भूमि मानी जाएगी।
बताया गया कि NZA (Non Zamindari Abolition) का अर्थ यह है कि संबंधित भूमि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 के अंतर्गत सामान्य कृषि भूमि की श्रेणी में नहीं आती। इसलिए उस पर कृषि भूमि से जुड़े सामान्य अधिकार स्वतः लागू नहीं होते।
ऐसी भूमि कई प्रकार की हो सकती है, जिनमें आबादी भूमि, वक्फ भूमि, मंदिर या अन्य धार्मिक संस्थाओं की भूमि, सरकारी विभागों की भूमि, नगर निकायों की भूमि, रेलवे एवं सिंचाई विभाग की भूमि तथा निजी गैर-कृषि भूमि शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भूमि की वास्तविक स्थिति और स्वामित्व जानने के लिए संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच करना आवश्यक है। केवल “Non-ZA” लिखा होना किसी भूमि के मालिक या उसके अधिकारों का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता।