क्यों आसानी से हो जाते है वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण।

शाहजहांपुर। स्थानीय स्तर पर वक्फ संपत्तियों को खुर्द वुर्द किए जाने की जानकारी तब अधिक चर्चा का विषय बनी जब वक्फ विभाग के वाम्सी पोर्टल पर दर्ज संपत्तियों को सरकार के उम्मीद पोर्टल पर, नई कमेटियों के साथ स्थानांतरण करने का अभियान चलाया गया।
उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के अभियान के चलते, जनपद भर में 3 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियों को आमतौर पर जनमानस में खुलासा होने के साथ यह भी बखूबी संज्ञान में आया कि कहां कहां और कौन कौन से संपत्ति वक्फ की किस कैटेगिरी में है और किन किन संपत्तियों को स्थानीय भू-माफिया बेच कर खा गए।
सूत्रों बताते है कि तिलहर नगर के प्रसिद्ध बली सैयद शमशुद्दीन मियां की हाईवे स्थित कब्रिस्तान रूपी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर उसे व्यवसायिक रूप प्रदान कर दिया गया, उम्मरपुर की एक वक्फ मस्जिद पर मुतावल्ली का वारिश होते हुए कथित तौर पर, उम्मीद पोर्टर जबरन फर्जी कमेटी दर्ज करवा दी गई, नितगंज स्थित चीकू वाले बाग के पास कब्रिस्तान को तो पूरी तरह जैसे गायब कर दिया गया आदि ऐसी बहुत से वक्फ संपत्तियों अभी बाकी है जो अवैध कब्जों की सूची में हैं।
नगर के कथित कब्रिस्तानों और मस्जिदों तथा गैर संपत्तियों जिनमें व्यवसायिक दुकानें और रिहायशी मकान भी लोगो की नजर में आते चले गए लेकिन यह सब चर्चा एक बार फिर वक्त की कोख में समा गई जबकि वहीं, कब्रिस्तानों को माफियाओं से बचाने की आड़ में मुस्लिम क़ौम के खैर-ख्वाह दिखाई देने वाले भी कब्रिस्तानों के गेट के नाम पर जहां अपनी बोली भी लाखों में लगाते दिखाई दिए। तो वहीं साथ ही सोशल मीडिया पर चमकने वाले कथित नेता भी कम नहीं समझे गए।
कब्रिस्तानों के गेट की लड़ाई गैर क़ौम से नहीं बल्कि अपने हु मुस्लिम भाइयों से रही और यह तब था जबकि आजके परिवेश में नगर के हर मोहल्ले का अपना कब्रिस्तान होने के बाद भी, मुस्लिमों के ठेकेदार है मोहल्ले तक के बने देखे जा सकते थे वही जब हिंदी पट्टी अंदर चुंगी स्थित बाईपास भक्सी तिराहा पर 11 जुलाई को एक कब्रियां का गेट उखाड़ कर उसे दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया तो उन सब तथाकथित ठेकेदारों के मुंह में जैसे दही जम गया, एक के मुंह से एक भी शब्द निकलते नहीं सुना गया।
बीते दस सालों में वक्फ संपत्तियों पर सबसे ज्यादा अवैध कब्जे हुए समझे जाते है जबकि 2023 में वक्फ संशोधन कानून पर तेजी से विरोधाभास भी देखने को मिला। यह दूसरी बात हो सकती होगी कि वक्फ संशोधन कानून के तहत सरकार की मंशा साफ न रही हो लेकिन यह जरूरी था कि वक्फ संपत्तियों को सूचीबद्ध किए जाने की काफी बड़ी आवश्यकता रही।