दिल्ली के जंतर मंतर चल रहे छात्र प्रोटेस्ट की समीक्षात्मक जमीनी हकीकत।
M. Imran sagar
दिल्ली की तेज गर्मी में भूखे प्यासे, अपने और देश के युवाओं के करियर को बचाने जंतर मंतर पर पूरी तरह निहत्थे, प्रोटेस्ट कर रहे छात्रो पर पुलिस ने जम कर कहर ढ़ाया। इसे किसी एक राज्य ने नहीं, देश ने नहीं बल्कि पूरी दुनिया ने तब देखा जबकि कोई ब्रांडेड मीडिया इसे कबरे करने नहीं पहुंचा।
वर्तमान में देश का सबसे बड़ा पर्यावरण विद सोनम वांगचुक ने CJP समर्थित युवा छात्र को समर्थन देने में जंतर मंतर स्थित धरना स्थल पर भी भूख हड़ताल कर दी। लगभग 19 दिन तक सरकार द्वारा कोई सुनवाई न होते देख सांसद भवन तक मार्च करने के ऐलान में दिल्ली शासन द्वारा श्री वांगचुक को स्वास्थ्य खराब होने के चलते उन्हें मेडिकल ट्रीट किए जाने की आड़ में गलत तरह से अरेस्ट कर लिए, यह दूसरी बात है कि पुलिस उन्हें हॉस्पिटल ही ले गई।
इस दौरान प्रोटेस्ट देश के कई राज्यों और जिलों में भी आरम्भ हो गए। इनमें कुछ ऐसे भी जिन्हें इस समय स्वयं को चमकाने का मौका मिल रहा था तो वही विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने इस छात्र प्रोटेस्ट को अपना पूरा समर्थन देकर देश भर की इकाइयों को निर्देश दिया कि वे अपने अपने क्षेत्र के जिला मुख्यालयों पर सांकेतिक धरना देते हुए ज्ञापन दे।
देश की राजनीति में विपक्ष भी पीछे नहीं दिखा। देश की सत्ता का विपक्ष में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, केजरीवाल, संजय सिंह, चंद्र शेखर आजाद, अखिलेश यादव ही नहीं बल्कि दिल्ली जंतर मंतर पर तमिलनाडु के सीएम विजय, एक्टर प्रकाश राज, नसीरुद्दीन शाह आदि दर्जनों देश की प्रसिद्ध हस्तियों ने भाग लिया जैसा कि सोशल मीडिया के जरिए लगातार देखने को मिला।
प्रार्थमिक तौर पर शिक्षा में बुनियादी जरूरत की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे छात्रों के ऐ आंदोलन को यूं ही इतना बल नहीं मिला क्योंकि इस बीच उन्हें सत्तापक्ष के जिम्मेदारों ने किन किन शब्दों से लगातार बदनाम ही नहीं किया बल्कि उनके ऊपर दिल्ली शासन द्वारा जुल्म की इंतहा भी सोशल मीडिया लगातार दिखा रहा है।
मिडिल क्लास अपनी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रहा है और उसके बाद भी लगातार लीक होते पेपर नहीं दिखे। हताश पेपर लीक से हताश हुए कुछ युवाओ ने आत्म हत्या तक कर ली तब भी किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगी क्योंकि कहीं न कहीं बड़े पैमाने पर शिक्षा पर माफिया राज कायम जरूर है जिसके डर से पेपर लीक मामले में शासन हस्तक्षेप करने की हिम्मत नहीं जुटा सका जिसके नतीजे इस आंदोलन को हवा मिली।
यहां अगर सारी बातों को नजर अंदाज भी कर दिया जाए तो धीरे धीरे देश का लगभग 75 प्रतिशत युवा वर्ग, जिसे देश का भविष्य कहा जाता है, इस प्रो टेस्ट में शामिल हो गया। ब्रिटिश सरकार से आजादी में लड़ने और गोरी सरकार द्वारा भारतीयों पर जुल्म करने की गाथाएं किताबों में ही पढ़ी लेकिन वे कैसी होगी, आज के युवा वर्ग ने इस प्रोटेस्ट में सिर्फ इसे ही नहीं समझा बल्कि और भी बहुत कुछ समझ गया कि सिस्टम की कमियों के कारण यदि नुकसान होने में पानी सर से ऊपर हो जाए और कोई सुनवाई न हो तो उनमें अपने अधिकारों के बल पर सिस्टम बदलने की ताकत भी है।